कु० शिखा
रोशनी वही है
आ गई दीपावली
छा गई दीपावली
मन में जो बसे हैं प्यारे
फिर मिलेंगे दोस्त हमारे।
सबके मन में भरी है उमंग
फिर उड़ेंगे खुशी के रंग
दीया बाती का है रिश्ता पुराना
पर अब तो है सीरीज का जमाना।
इस अवसर पर पटाखे हैं फूटते
शोर और धुँआं नींद को हैं लूटते
प्रदूषण देश में तेजी से हो रहा है
देश अपना सुख और चैन खो रहा है।
बीमारी है, कि सर पर खड़ी रहती है
एक ना एक पड़ी ही रहती है
अस्थमा, ब्रांकाइटिस की तो अलग बात है
कुछ बीमारी तो दवा को भी देतीं मात है।
यह नहीं आशय कि दीवाली न मनाइए
स्वयं को और दूसरों को जागरूक बनाइए
शोर और धुँआं दीवाली नहीं है
पर जो उज्ज्वल करे आत्मा रोशनी वहीं है।
-कु० शिखा तिवारी
ggggggggggggggggggggg

कु० शिखा तिवारी
Ku. SHIKHA TIWARI
कक्षा- XI- विज्ञान
केन्द्रीय विद्यालय
प्रतिभूति कागज कारखाना
होशंगाबाद (म.प्र.) 461005

1 Comments:
Very good
Ripusoodan Das, U.K.
Post a Comment
<< Home